रेडियो धारावाहिक ''धरती मेरी धरती''

निदेशक महोदय विज्ञान प्रसार का संदेश

 

हम जानतें हैं कि पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन है। सूक्ष्मजीव, वनस्पतियां व विभिन्न जीव-जन्तु यहां जीवन के विविध रूपों में समन्वय बनाए हुए है, जिसे हम जैवविविधता कहते हैं। जीवन का हर एक रूप या कहें कि जीवों की एक प्रजाति अपने अस्तित्व के लिए दूसरी प्रजाति पर निर्भर है। पृथ्वी पर जीवन के विविध रूपों की जब हम बात करते हैं तो हम मानव प्रजाति की भी बात करते हैं।

          यदि हम अपने पर्यावरण को समझना और उसे सुरक्षित बनाए रखना चाहते हैं, तो हमें पृथ्वी पर उपस्थित जीवन के विभिन्न रूपों की परस्पर निर्भरता और जीवन के लिए हवा, पानी व मिट्टी जैसे प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझना होगा। 

          पृथ्वी पर जीवन, लाखों-करोड़ों वर्षों के दौरान पर्यावरण में होने वाले परिवर्तन के परिणामस्वरूप पनपा है। जीवोें की वे ही प्रजातियां पृथ्वी पर रही हैं जिन्होंने पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार अपने को ढाल लिया था ।

          परन्तु आज पर्यावरण में बदलाव तेजी से हो रहे हैं। आज हमारे ग्रह पर कई खतरे मंडरा रहे हैं जो मुख्यत: बदलती जलवायु, बिगड़ता पर्यावरण, प्रजातियों का तेजी से होता सफाया, शुध्द जल की घटती उपलब्धता, नदियों का समुद्र में पहुंचने से पहले सूखना, बंजर होती उपजाऊ भूमि, ऊर्जा स्रोतों की बिगड़ती हालत, बड़ती बीमारियां, तेजी से बड़ती जनंसख्या का पेट भरने की समस्या आदि है। इन सबकी वजह से आज मानव का अस्तित्व ही खतरे में हैं।

          आज हम चादर से अधिक पैर पसार रहे हैं। हम पृथ्वी के संतुलन को बनाए रखने के लिए आवश्यक मात्रा से अधिक प्राकृतिक साधनों का दोहन कर रहे हैं जिससे आज विकासशील देशों के अरबों लोग संकट के साये में जी रहे हैं।  

          इस दिशा में विश्व का ध्यान आकर्षित करने और यह बताने के लिए कि पर्यावरण वह है जहां हम रहते हैं और विकास को एक नए परिपेक्ष्य में देखने व समझने की कोशिश करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2008 को 'पृथ्वी ग्रह वर्ष' के रूप में मनाने की घोषणा की है। यह आशा है कि सभी के सहयोग से हम पृथ्वी ग्रह पर जीवन और जैवविविधता को बनाए रखेंगे। इसी धारणा के साथ इस वर्ष सारे विश्व में अनेक गतिविधियां और कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पृथ्वी ग्रह वर्ष मनाने से संबंधित एक महत्वपूर्ण पहलू लोगों को चुनोतियों के साथ संभावित समाधानों के प्रति जागरूक करते हुए पृथ्वी ग्रह को संभावित विपदाओं से बचाना है।

 

          इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विज्ञान प्रसार और ऑल इंडिया रेडिया द्वारा संयुक्त रूप से 19 भारतीय भाषाओं में 52 कड़ियों वाला 'घरती मेरी धरती' रेडियो धारावाहिक ऑल इंडिया रेडिया के 100 से भी अधिक केंद्रों से प्रसारित किया जा रहा है। विज्ञान प्रसार भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्तशासी संस्था है। जिसका उद्देश्य विज्ञान संचार को बढ़वा देने के साथ ही लोगों में वैज्ञानिक जागरूकता का प्रसार करना है।

 

          इस धारावाहिक के माध्यम से पृथ्वी ग्रह के विभिन्न पहलुओं जैसे पृथ्वी के निर्माण, स्थलमंडल, महासागरों, वायुमंडल, जैवमंडल और जैवविविधता पर बात की जाएगी। इस बात पर भी चर्चा की जाएगी कि किस प्रकार मानव ने पृथ्वी पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है और मानव व पृथ्वी के रिश्तों को फिर से सु-मधुर बनाने के लिए क्या कार्य किए जा सकते हैं। धारावाहिक की प्रत्येक कड़ी एक नाटक के रूप में प्रस्तुत की जाएगी जिसमें एक परिवार की नजर सक विभिन्न मुद्दों को समझाने की कोशिश की गई है।

 

 

 

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