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सुचालक नलिका के अंदर गिरता चुंबक

 

उद्देश्य : किसी सुचालक नलिका में चुंबकी की गति का अध्ययन करना।

 

उपकरण : करीब एक मीटर लंबी और लगभग एक सेंटीमीटर भीतरी व्यास वाली धातु की नलिका, बटल की शक्ल का एक शक्तिशाली चुंबक।

 

भूमिका : एक सुचालक नलिका के अंदर से जब एक चुंबक नीचे गिरता है तो चंबक के कारण बना हुआ चुंबकीय क्षेत्र बदलता रहता है। नलिका में विभिन्न स्थानों पर न केवल चुंबकीय क्षेत्र असमान होता है बल्कि किसी नियत स्थान पर वह समय के साथ बदलता भी रहता है। समय के साथ बदलता हुआ यह चुंबकीय क्षेत्र विद्युत वाहक बल प्रेरित करता है जो नलिका के पदार्थ में विद्युत धारा को संचालित करता है। धारा के कारण जूल तापन के रूप में ऊर्जा का क्षय होता है और यह ऊर्जा नीचे गिरते हुए चुंबक की यांत्रिक ऊर्जा से प्राप्त होती है। इस तरह चुंबक पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है जो उसकी गति को धीमा कर देता है। इस कारण नलिका के अंदर से गिरने में चुंबक असामान्य रूप से अधिक समय लेता है।

 

विधि : एक शक्तिशाली, बटल की शक्ल का लघु बेलनाकार चुंबक लें। चुंबक के उत्तारी और दक्षिणी धु्रव इसकी समतल सतहों पर होते हैं। इस तरह के चुंबक नियोबियम-आयरन बोरॉन मिश्रधातु ;एलॉय जैसे कुछ चुंबकीय मिश्रधातुओं से बने होते हैं। चुंबक का आकार ऐसा होना चाहिए कि आपके द्वारा प्रयोग में लाई जाने वाली एल्युमीनियम नलिका के अंदर से होकर यह आसानी से गुजर सके। चुंबक की तरह दिखने वाला नट या बोल्ट जैसा अचुंबकीय लोहे का एक टुकड़ा और विभिन्न पदार्थों से बनी दो या तीन छोटी वस्तुएं लें।

 एल्युमीनियम नलिका को ऊर्ध्वाधर स्थिति में एक हाथ से पकड़कर रखें। नलिका के ऊपरी सिरे से विभिन्न वस्तुओं को उसके अंदर गिराएं और विद्यार्थियों से उन वस्तुओं के नलिका को पार करने में लगे समय का आकलन करने के लिए कहें। यदि आपकी नलिका एक मीटर लंबी है तो उन वस्तुओं को बाहर निकलने में एक सेकेंड का क्षणांश ही लगेगा और आकलन करने में कठिनाई होगी। लेकिन उनके मन में यह बात होगी कि यह समय एक सेकेंड से कहीं कम है।

 अब चुंबक को नलिका के अंदर गिराएं। चुंबकी की समतल सतहें क्षैतिज रहें। विद्यार्थी यह देखकर आश्चर्यचकित रह जाएंगे कि चुंबक बाहर नहीं आ रहा है। उसे बाहर आने में अन्य वस्तुओं की तुलना में बहुत अधिक समय लगता है। यह समय नलिका की दीवार की मोटाई और उसकी मजबूती पर निर्भर करता है। मेरे द्वारा प्रयोग में लाई गई नलिका के लिए यह समय लगभग 7 सेकेंड है जो अन्य वस्तुओं के समय की तुलना में 25 गुना से भी अधिक है।

 

चर्चा : समझने की दृष्टि से यह जानना जरूरी है कि गिरते हुए चुंबक पर ऊपर की ओर लगने वाला यह बल कहां से आया। उच्च कक्षाओं के विद्यार्थिया से नलिका में बहती धारा की दिशा पर आप चर्चा कर सकते हैं। नलिका में धारा वृत्तााकार पथों में प्रवाहित होती है। नलिका का जो भाग चुंबक के ऊपर है उसमें वह एक दिशा में प्रवाहित होती है तो चुंबक के नीचे के भाग में दूसरी दिशा में। मान लें कि चुंबक का उत्तारी ध्रुव ऊपर और दक्षिणी ध्रुव नीचे की ओर है। शीर्ष से देखने पर चुंबक के ऊपर धारा वामावर्त और उसके नीचे दक्षिणावर्त दिशा में होगी। परन्तु दोनों प्रकार की धाराएं चुंबक पर ऊपर की ओर ही बल लगाती हैं।