गतिविधि आधारित विज्ञान शिक्षण>घूमने वाली स्ट्रॉ


भूमिका  जैसा कि हम जानते हैं कि रगडने या प्रेरण के द्वारा विद्युत आवेश उत्पन्न किया जा सकता है । आपने कंघे से बाल बना कर उससे जमीन पर पडे छोटे कागज के टुकडों को आकषत किया होगा । आप यह भी जानते होंगे कि आवेश दो प्रकार के होते हैं एक प्रकार को धन आवेश तथा दूसरे प्रकार को ॠण आवेश कहा जाता है । समान प्रकार के आवेश एक दूसरे को प्रतिकषत करते हैं अर्थात दूर भगाते हैं और विपरीत प्रकार के आवेश एक दूसरे को आकषत करते हैं अर्थात नजदीक लाते हैं।  इसी को हम एक मनोरंजक  प्रयोग द्वारा देखेंगे ।

 

आवश्यक सामग्री  दो स्ट्रॉ ( शीतल पेय पीने वाली नली ), एक बोतल, जिसका ढक्कन समतल सतह का हो और जिसमें घर्षण बहुत ही कम हो ।

 

प्रयोगविधि 

 1. एक प्लास्टिक की बोतल लें जिसका ढक्कन समतल हो ।

2. दो स्ट्रॉ लें एवं इन्हें एक ओर से पकडकर रुमाल से दो या तीन बार अच्छी तरह रगड दें ।

3. अब इनमें से एक स्ट्रॉ को ढक्कन के ऊपर इस प्रकार से रखें कि यह जमीन के समांतर रहे एवं इसका मध्य भाग ढक्कन के ऊपर आ जाये ।

4. अब दूसरी स्ट्रॉ लें । उसे एक ओर से पकडकर पहली वाली स्ट्रॉ के पास लायें ।

5. जैसे ही यह दूसरी स्ट्रॉ बोतल पर रखी स्ट्रॉ के पास लाई जाती है यह बोतल पर स्थित अपने टिकान बिन्दु पर घूमकर इससे दूर    हो जाती है ।

6. इस प्रकार यदि हम हाथ में पकडी हुई स्ट्रॉ को भी इसकी ओर गोलाई में घुमाते जायें तो स्ट्रॉ लगातार उससे दूर होती चली जाती है अर्थात घूमती जाती है । प्रतिकर्षण का यह दृश्य अत्यंत मनोरंजक होता है ।

7. अब दूसरी स्ट्रॉ की जगह उस रुमाल को जिससे स्ट्रॉ को रगडा गया था, पहली वाली स्ट्रॉ के पास लायें ।

8. पहली वाली स्ट्रॉ अब रुमाल की तरफ आकषत होने लगती है । रुमाल को भी गोलाई में उससे दूर घूमाते जाने पर स्ट्रॉ भी  उसकी ओर जाते हुये घूमती जाती है ।

 

विवेचना  जब दोनो स्ट्रॉ एक साथ रुमाल से रगडी जाती है तो उन दोनो में एक ही प्रकार का आवेश उत्पन्न हो जाता है एवं रुमाल में उनसे विपरीत आवेश उत्पन्न हो जाता है । पहली स्थिति में चूंकि दोनो स्ट्रॉ पर समान आवेश है इसलिये वे एक दूसरे को प्रतिकषत करती हैं  और बोतल पर रखी स्ट्रॉ हाथ में पकडी हुई स्ट्रॉ से दूर जाती है । दूसरी स्थिति में रुमाल पर आवेश स्ट्रॉ पर स्थित आवेशों से विपरीत होते हैं इसलिये यहाँ रुमाल और स्ट्रॉ एक दूसरे को आकषत करते हैं । इस प्रकार बोतल पर रखी स्ट्रॉ रुमाल के पास आती है ।

जिस बोतल के ऊपर स्ट्रॉ रखी जाती है वहाँ पर ढक्कन और स्ट्रॉ के बीच का धर्षण कम से कम होना चाहिये और स्ट्रॉ बोतल पर घूमने के लिये स्वतंत्र होना चाहिये ।

 

कुछ और करें और सोचें  सदयों में अक्सर लोग अपनी हथेलियों को रगडते हुए मिल जायेंगे । जब हम अपने दोनो हाथों को रगडते हैं क्या उनपर आवेश आ जाता है ? एक प्रयोग बनाइये जिससे इस प्रश्न का उत्तर मिल सके ।