गतिविधि आधारित विज्ञान शिक्षण>आज्ञाकारी बोतल


 भूमिका हमारे चारो तरफ वायुमंडलीय दबाब है। ऐसा हमने किताबो मे पढा है, और सुना भी है । यहां पर
हम इस बात को अनुभव करने के लिये एक छोटा सा प्रयोग करेंगे ।

 

प्रयोगविधि

1. मध्यम आकार की एक प्लास्टिक की बोतल लें ।

2. बोतल की पेंदी में छोटेछोटे कई छेद करें ।

3. इन छेदों को आप सुई या सेफ्टीपिन की सहायता से कर सकते हैं  ।

4. बोतल के ऊपरी भाग मे मुँह से नीचे अर्थात बोतल की गर्दन मे भी एक बारीक छेद करें  ।

5. एक टब जमीन पर रखें ।

6. बोतल को टब के ऊपर करीब आधे मीटर की दूरी पर रखे।

7. बोतल मे पानी भरें और उसका ढक्कन बन्द कर दें । पानी का तल बोतल के मुँह के पास के छेद से नीचे हो ।

   क्या होगा ?

निश्चित है कि पानी नीचे के छेदों  से निकलने लगेगा । यदि आप चाहें तो नीचे से पानी निकलना बन्द भी कर सकते हैं सोचिये कैसे ?

बोतल की गर्दन मे जो आपने छेद किया है उस पर उंगली रखें, बस पानी निकलना बन्द । इस तरह जब पानी निकालना हो तो उंगली हटा लें और जब बन्द करना हो तो उंगली रख दें  । केवल एक प्लास्टिक की बोतल की सहायता से एक आज्ञाकारी यंत्र तैयार है, जिससे हम हवा के दबाव का प्रभाव समझ सकते हैं ।

 

 

विवेचना  आइये समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है । जब बोतल की पेंदी और गर्दन के छिद्र खुले होते हैं, उस स्थिति में पानी के स्तंभ के कारण बोतल की पेंदी पर का कुल दाब बाहर की हवा के दाब से अधिक होता है, जिसके कारण पानी बोतल के पेंदी में बने छिद्रों से बाहर निकलता है । बाहर की हवा छिद्र से पानी को नहीं निकलने देना चाहती और अन्दर से पानी का दाब उसे निकालने का प्रयास करता है । गर्दन का छिद्र खुला रहने के कारण बोतल में गर्दन के पास की हवा का दाब वायुमंडलीय दाब के बराबर होता है । इस दाब में पानी के कारण दाब मिलकर छिद्र में अन्दर से दाब वायुमंडलीय दाब से अधिक हो जाता है । इसी कारण पानी छिदों से बाहर आता है ।  अब यदि गर्दन पर बने छिद्र को उंगली की सहायता से बन्द कर दें तो ऐसा पाते हैं कि पानी का गिरना बन्द हो जाता है । क्या उंगली रखते ही पानी निकलना बन्द हो जाता है ? यदि आप ध्यान से देखें तो यह ज्ञात होता है कि गर्दन के छिद्र को बन्द करने के कुछ क्षण बाद पानी का गिरना बन्द होता है । ऐसा इसलिये होता है क्योंकि ऊपर वाले छिद्र को बन्द करने के बाद पानी के स्तंभ के ऊपर की जगह का वायुमंडलीय हवा से संपर्क टूट जाता है, फलत: जैसे ही थोडा सा पानी पेंदी के छिद्र से बाहर निकलता है बोतल के ऊपरी सिरे पर बन्द हवा का आयतन बढ जाता है और हवा के आयतन बढने के साथ बन्द हवा का दाब कम हो जाता है । अब पानी के ऊपर की बन्द हवा का दाब तथा पानी के स्तम्भ का दाब  छिद्र पर लगने वाले वायुमंडलीय दाब से अधिक नहीं हो पाता और इसलिये पानी का गिरना बन्द हो जाता है ।

 

 

कुछ और करें व सोचें  बोतल की गर्दन मे जहाँ आपने एक छेद किया था वहाँ दो छेद करके देखे । क्या होता है? बोतल का ढक्कन खोलकर यही प्रयोग दोहराये। क्या पेंदी मे बहुत सारे छेद करना जरुरी है ? एक छेद करने से काम नही चलेगा?