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14
जनवरी,
2010
विज्ञान प्रसार द्वारा
15
जनवरी, 2010 को घटित
वलायाकार सूर्यग्रहण के अवलोकन के लिए तमिलनाडु विज्ञान एवं
प्रौद्योगिकी केंद्र (टीएनएसटीसी) के साथ संयुक्त रूप से एक राष्ट्रीय
कैम्प का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के अन्य साझेदार राष्ट्रीय
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद (एनसीएसटीसी),
नई दिल्ली और सेंट. एंथनी सीनियर सेकेंडरी स्कूल,
कन्याकुमारी थे।
इस शिविर के लिए बच्चों का चयन विपनेट क्लबों से किया
गया। उन्हें उनके द्वारा जारी की गई योजनाओं में से विपनेट क्लबों
द्वारा विप्र को प्रेषित परियोजनाओं के आधार पर चुना गया। विपनेट
क्लबों को खगोलिकी गतिविधियों से संबंधित विचाी पत्रिका तथा डाक से
भेजा गया था। इस शिविर में प्रत्येक राज्य से राष्ट्रीय बाल विज्ञान
कांग्रेस में भागीदारी करने वाले दो बाल वैज्ञानिकों एवं
100 सक्रिय विज्ञान क्लबों के
सदस्यों को भी शामिल किया गया था। इस प्रकार शिविर में 26
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 827
प्रतिभागियों का नामांकन
किया गया। इस कार्यक्रम के लिए कुछ विख्यात वैज्ञानिकों और विज्ञान
संचारकों को भी विशेष रूप से आमंत्रिात किया गया था।
इस तीन दिवसीय शिविर में प्रतिभागियों के लिए अनेक
कार्यक्रम और गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरंभ दीप
प्रज्वलन से हुआ जिसके बाद सेंट. एंथनी सीनियर सेकेंडरी विद्यालय के
विद्यार्थियों द्वारा स्वागत गीत गाया गया। इस अवसर पर कन्याकुमारी के
जिलाधीश श्री राजिंद्र रत्नू,
डा. वी.बी.काम्बले (पूर्व निदेशक विप्र),
इंजी. श्री अनुज सिन्हा (पूर्व प्रमुख एनसीएसटीसी),
डॉ. अरूल गेराल्ड प्रकाश (निदेशक,
केरल राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी),
डॉ. पी. इयापेरूमल,
कार्यकारी निदेशक, टीएनएसटीसी,
श्रीमती उज्जवला तिर्की,
वैज्ञानिक 'ई' (एनसीएसटीसी)
उपस्थित थे।
अपने स्वागत भाषण में डॉ. पी. इयापेरूमल ने कन्याकुमारी
की विशेषताओं पर प्रकाश डाला और वलायाकार सूर्यग्रहण के अवलोकन के लिए
शिविर हेतु इस स्थान को चुनने के विशेष कारणों के बारे में बताया। इस
अवसर पर उन्होंने वलायाकार सूर्यग्रहण और इसकी अद्वितीयता की भी
व्याख्या की।
अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में इंजी. अनुज सिन्हा ने
किशोरों से कठोर मेहनत,
सूक्ष्म अवलोकन द्वारा वैज्ञानिक बनकर ब्रह्मांड के
बारे में नए ज्ञान को प्राप्त करने की अपील की। उन्होंने समाज में
विज्ञान संचारकों की भूमिका के बारे में बताते हुए कहा कि ''महान
वैज्ञानिक वे हैं जो केवल समस्याओं का ही समाधान नहीं करते बल्कि कई
प्रश्नों को भी जन्म देते हैं।''
इस अवसर पर विज्ञान प्रसार के पूर्व निदेशक डॉ.
वी.बी.काम्बले ने कहा कि देश में किस प्रकार वैज्ञानिक व्यवहार और
दृष्टिकोण बढ़ रहा है। इसके लिए उन्होंने सन्
1995 के पूर्ण सूर्यग्रहण के बाद से लेकर अब तक के
ग्रहणों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि लोगों के सोचने के ढंग में
अद्भुत परिवर्तन आ रहा है। अब वे अंधविश्वासों,
रूढ़ियों,
अवैज्ञानिकता और मिथ्या धारणाओं से मुक्त हो रहे हैं।
श्री बी.के.त्यागी,
प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी,
विप्र ने इस अवसर पर शिविर में प्रतिभागियों के
चुनाव के बारे में जानकारी देते हुए तीन दिवसीय शिविर में होने वाले
कार्यक्रमों की रूपरेखा के बारे में बताया। डॉ. एस सुंदरराजपेरूमल,
संयुक्त-निदेशक टीएनएसटीसी
ने आभार व्यक्त किया।
शिविर के पहले दिन तीन समानंतर सत्रों में व्याख्यान,
प्रदर्शन और चर्चाओं की शृंखलाओं का आयोजन किया
गया। वैज्ञानिकाें द्वारा दिए गए व्याख्यानों में ग्रहण को समझने,
आंख की रचना, दृष्टि
विज्ञान और ग्रहण्ा को सुरक्षित रूप से देखने जैसे विभिन्न पहलू शामिल
थे। तीनों समानांतर सत्राों में विज्ञान प्रसार द्वारा विकसित खगोलिकी
किट का प्रदर्शन भी किया गया। ग्रहण के दौरान गतिविधियां किस प्रकार की
जाएं, इस संबंध में
भी एक संक्षिप्त सत्रा आयोजित किया गया। प्रत्येक प्रतिभागी को एक
गतिविधि दी गई जो उसे ग्रहण के दौरान करनी थी। समूह प्रतिनिधियों को
गतिविधि के लिए गतिविधि-पत्रक और निर्देशों के साथ ही आवश्यक सामग्री
भी उपलब्ध कराई गई।
चारों गतिविधियां निम्नांकित थीं :
1)
सूर्य और चंद्रमा का कोणीय आकार ज्ञात करना।
2)
ग्रहण का प्रतिशत निकालना
3)
वलायाकार ग्रहण का अधिकतम समय निकालना।
4)
वनस्पतियों और प्राणियों पर ग्रहण के प्रभाव को नोट
करना।
शाम को
6
बजे प्रतिभागी बच्चाें के लिए लिखित प्रश्नोत्तारी
का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 400 बच्चों
ने भाग लिया। उसी समय शिक्षकों एवं क्लबों के समन्वयकों के लिए भी एक
सत्र का आयोजन किया गया जिसमें डॉ. वी.बी.काम्बले,
इंजी. अनुज सिन्हा,
श्रीमती उज्जवला तिर्की और श्रीमती इंदु पुरी ने भागीदारी की। इस चर्चा
का मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और उनसे संबंधित विभिन्न विषयों
जैसे उनके स्वास्थ्य, सेनिटेशन और पोषण आदि
कार्यक्रमों में विपनेट क्लबों की सक्रिय सहभागिता पर जोर देना था।
श्री निमिष कपूर द्वारा क्लब समन्वयकों को वर्ष दौरान 'अतंर्राष्ट्रीय
जैव विविधता वर्ष-2010'
में किए जा सकने वाले कार्यक्रमों और गतिविधियों पर
जानकारी दी गई।
15
जनवरी,
2010
यह दिन वलयाकार सूर्यग्रहण का दिन था। सभी प्रतिभागी
सुबह
9.15 पर विद्यालय प्रांगण
में एकत्रा हुए। एक बार फिर से आवश्यक निर्देशों और सावधानियों के बारे
में बताया गया। इसके बाद स्वयंसेवकों ने प्रतिभागियों को अवलोकन स्थल
की राह बताई।
अवलोकन स्थल पर ग्रहण के दौरान सूर्य की आकृति का
प्रेक्षण करने के लिए दूरबीनों की व्यवस्था की गई थी। आवश्यक अवलोकनों
और प्रत्येक बच्चों को दी गई गतिविधि के हिस्से के रूप में सूर्य की
आकृति को पर्दे पर प्रक्षेपित करने के लिए छोटे दर्पण लगी गेंदों का
वितरण किया गया। टीम लीडरों और स्वयंसेवकों को भी गतिविधियों के लिए
अतिरिक्त सामग्री उपलब्ध कराई गई। ग्रहण की पूरी अवधि के दौरान सावधानी
बरतने के साथ ही पहले और अंतिम स्पर्श के लिए नियमित रूप से घोषणा की
जा रही थी। सौर फिल्टरों की सहायता से सभी ने ग्रहण को देखा।
वैज्ञानिकों और स्वयंसेवकों ने ग्रहण के दौरान गतिविधि संपन्न करने में
बाल वैज्ञानिकों की सहायता की। लगभग
300
बाल वैज्ञानिकाें ने अपने परिणामों की रिपोर्ट आयोजनकर्ताओं को दी।
जिनका विश्लेषण किया जा रहा है।
16
जनवरी,
2010
शिविर का अंतिम दिन मुख्य रूप से अनुभवों की साझेदारी,
बाल वैज्ञानिकों को पुरस्कार और प्रमाण पत्रा वितरण
का दिन रहा। सभी प्रतिभागी सुबह 10
बजे एकत्र हो गए थे। पहले सत्रा में अतंर्राष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष
के बारे में जानकारी दी गई।
फीड बैक फार्म से प्राप्त जानकारी के आधार पर
प्रतिभागियों में से अधिकतर के लिए यह तीन दिवसीय शिविर एक अद्वितीय
अनुभव रहा। समापन समारोह के दौरान प्रश्नोत्तारी के विजेताओं को
विज्ञान प्रसार की पुस्तकें और सीडी पुरस्कार स्वरूप दी गईं। बाल
वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत श्रेष्ठ
15
परियोजनाओं के लिए उन्हें सम्मानित करने के साथ ही विज्ञान प्रसार के
प्रकाशन किट और अन्य साफ्टवेयर भी प्रदान किया गया।
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