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अग्रसारी कार्यक्रम
खगोलिकी का
अन्तर्राष्ट्रीय वर्ष 2009
कितना
अच्छा हो कि विश्व के लोग दिन और रात
के समय आकाश का अध्ययन करके विश्व में
अपना स्थान फिर से खोंजें और विस्मय
तथा खोज की व्यक्तिगत अनुभूति से
जुड़ें। यह महत्वपूर्ण है कि सभी मानव
खगोलिकी तथा आधारभूत विज्ञान के हमारे
दैनिक जीवन पर प्रभाव को स्वीकारें और
भली प्रकार समझें कि वैज्ञानिक ज्ञान
किस प्रकार एक समरस, शांत समाज के
निर्माण में योगदान कर सकता है। यही
कारण है कि संयुक्त राष्ट्र ने अपनी
62वीं आम सभा में वर्ष 2009 को
खगोलिकी का अन्तर्राष्ट्रीय वर्ष
(प्ल्। 2009) घोषित किया है जिसका
मुख्य विचार है, ''ब्रहाण्ड आपका है
इसको खोजिए।''
खगोलिकी के
अन्तर्राष्ट्रीय वर्ष प्ल्। 2009 के
साथ ही हम एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक
घटना का स्मृति समारोह भी मनाएंगे और
वह है गैलिलियों द्वारा टेलीस्कोप का
प्रथम खगोलिक उपयोग, एक ऐसी खोज जिसने
400 वर्ष के विस्मयकारी खगोलिकीय
अनुसंधान का पादुर्भाव किया। इस
प्रकार हम महानतम वैज्ञानिकों मे से
एक उस अप्रितम वैज्ञानिक को अपने
श्रद्वा सुमन अर्पित करेंगे।
गैलिलियों के टेलीस्कोप ने, वास्तव
में, एक ऐसी वैज्ञानिक क्रांति का
सूत्रापात किया जिसने हमारी वैश्विक
दृष्टि में आमूलचूल परिवर्तन ला दिया।
आइन्स्टाइन ने एक बार लिखा था ''शुद्व
तार्किक चिन्तन के द्वारा हमें अनुभव
जन्य जगत का ज्ञान नहीं हो सकता;
यर्थाथ का सम्पूर्ण ज्ञान अनुभव से
प्रारंभ होकर अनुभव में ही समाप्त हो
जाता है। गैलिलियो ने इस तथ्य को
पहचाना, और विशेषकर विज्ञान जगत में
उसका शंखवाद किया, इसलिए वह आधुनिक
भौतिकी के वास्तव में तो सम्पूर्ण
आधुनिक विज्ञान के पिता है।''
जो भी देश
प्ल्। 2009 की गतिविधियों में भाग
लेंगे वे स्थानीय, क्षेत्राीय और
राष्ट्रीय स्तर पर इससे संबंधित
कार्यक्रम आयोजित करेंगे। विज्ञान
प्रसार ने एक महत्वाकांक्षी अभियान की
योजना बनाई है। जिसके तहत 52 कड़ियों
की एक रेडियो सीरियल निर्मित किया
जाएगा जो अंग्रेजी सहित 19 भारतीय
भाषाओं में ऑल इंडिया रेडियों के 100
से अधिक स्टेशनों से प्रसारित होगा
तथा खगोलिकी पर 26 कड़ियों का एक
टेलीविजन सीरियल भी बनाया जाएगा। इनके
साथ ही विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण
कार्यक्रमों की योजना भी है। अभियान
का एक प्रमुख अंग 22 जुलाई 2009 को
होने वाले और भारत में दिखाई पड़ने
वाले पूर्ण सूर्य ग्रहण के इर्द गिर्द
निर्मित की जाने वाले गतिविधियाँ
होगी। प्रोफेसर जयन्त नार्लीकर कहते
हैं कि इस घटना के समारोहों का आयोजन
करते समय हमें जीवन और जिज्ञासा की उस
भावना से निर्देशित होना चाहिए जिसने
गैलिलियों को प्रेरणा दी थी।
जन-जन तक
पहुंचने के विज्ञान प्रसार के अभियान
में प्रारंभ की गई/जाने वाली
गतिविधियों का विवरण नीचे प्रस्तुत
है:
खगोलिकी का
अन्तर्राष्ट्रीय वर्ष: 2009: अग्रसारी
कार्यक्रम
1. खगोलिकी पर रेडियों
शृंखला -
अंग्रेजी सहित 19
प्रमुख भारतीय भाषाओं में खगोलिकी पर
52 कड़ियों की रेडियो शृखला के निर्माण
एवं प्रसारण की योजना है। यह
कार्यक्रम जनवरी/फरवरी 2009 से, ऑल
इंडिया रेडियों के 117 स्टेशनों से
देश भर में एक साथ प्रसारित किया
जाएगा। इस परियोजना पर कार्य पहले ही
प्रारंभ किया जा चुका है।
2. खगोलिकी पर
टेलीविजन शृंखला:
खगोलिकी पर हिंदी
में, 26 कड़ियों की एक टेलीविजन शृखला
का निर्माण एवं प्रसारण किया जाएगा।
यह कार्यक्रम दूरदर्शन के राष्ट्रीय
चैनल पर रविवार प्रात: 9.00-9.30 की
समयावधि में प्रसारित होगा। बाद में
सभी 26 कड़ियों को भारत की 12 प्रमुख
भाषाओं में डब किया जाएगा तथा देश भर
में फैले दूरदर्शन के क्षेत्राीय
नेटवर्क के माध्यम से क्षेत्राीय
दूरदर्शन केंद्रो (टी.वी.स्टेशनों)
द्वारा प्रसारित किया जाएगा। इस
परियोजना पर कार्य पहले ही शुरू किया
जा चुका है।
3. प्रकाशन
खगोलिकी संबंधी
विभिन्न विषयों पर लोकप्रिय स्तर की
लगभग 10 पुस्तकों का प्रकाशन अंग्रेजी
एवं हिंदी दोनो भाषाओं में किया
जाएगा। बाद में से सभी पुस्तकें अन्य
भारतीय भाषाओं में भी अनुवाद की
जाएगी।
4. क्रिया- कलाप किट:
खगोलिकी के आधारभूत
पक्षों/प्रक्रमों पर आधारित 25-30
क्रियाकलापों से युक्त एक कम कीमत का
क्रियाकलाप किट-सह-शैक्षिक पैकेज
विकसित किया गया है। क्रिया कलाप किट
हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में
निकाला जाएगा। इसका विकास पहले ही
किया जा चुका है और इसमें एक सुरक्षित
सूर्य दृश्यक भी शामिल है।
5. प्रदर्शन:
खगोलिकी/खगोलभौतिकी के क्षेत्रा में
कार्यरत वैज्ञानिकों /संगठनों के साथ
मिलकर खगोलिकी के विभिन्न पक्षों पर
व्याख्यानाें/प्रदर्शनों की योजना
बनाई गई है।
6. प्रशिक्षण:
भारत के विभिन्न
क्षेत्राों/राज्यों के स्रोत
व्यक्तियों के लिए प्रशिक्षण
कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। फिर
ये स्रोत व्यक्ति अपने- अपने
राज्यों/प्रांतों में अन्य संप्रेषकों
को प्रशिक्षित करेंगे। इसके लिए वे
वार्तांएं आयोजित करने के साथ ही
खगोलिकी के लोकप्रिय पक्षों पर
क्रियाकलाप करके दिखाएंगे। यह
कार्यक्रम विज्ञान लोकप्रियकरण के
क्षेत्रा में कार्यरत सरकारी/गैर
सरकारी संगठनों के सहयोग से आयोजित
किए जाएंगे।
7. कार्यशालाएं:
देश के विभिन्न भागों
में टेलीस्कोप निर्माण के लिए
कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
पूर्ण सूर्यग्रहण
2009: अग्रसारी कार्यक्रम
स्कूल स्तर पर:
जिला/राज्य स्तर पर
व्याख्यान/प्रदर्शन,
प्रश्नोतरी/निबंध/वक्तृवय
प्रतियोगिताएं तथा कुछ सरल
परियोजनाएं।
राज्य स्तर के प्रथम
तीन विजेताओं को पुरस्कार के रूप में
पूर्ण सूर्य ग्रहण दर्शन की पट्टी में
किसी उपयुक्त स्थान पर जाकर ग्रहण
देखने का अवसर प्राप्त होगा।
इस उद्देश्य के लिए
विषयानुसार चार्ट, पोस्टर, क्रियाकलाप
पैकेज लघुपुस्तिकाएं तथा ग्रहण के
विविध पक्षों पर दृश्य/श्रव्य
कार्यक्रम निर्मित किए जाएंगे।
टेलीस्कोप निर्माण की
6-8 क्षेत्राीय कार्यशालाएं-सह
प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए
जाएंगे जिनमें से प्रत्येक क्षेत्रा
में 3-4 राज्यों का प्रतिनिधित्व
रहेगा। प्रत्येक ग्रहण का प्रेक्षण
करने के लिए तथा संगत विद्यालयों में
खगोलीय गतिविधियों का शुभारंभ करने के
लिए प्रयोग में लाए जाएंगे।
जन स्तर पर
व्याख्यान/प्रदर्शन,
प्रदर्शनिया तथा विविध विषयों पर
पोस्टरों तथा लघु पुस्तिकाओं को तैयार
करना तथा उनको जन-जन के बीच ले जाना।
समाचारपत्राों एवं
पत्रिाकाओं में लेख, विशिष्ट विषयों
पर लघुपुस्तिकाएं।
रेडियो/टेलीविजन
कार्यक्रमों का निर्माण तथा उनका
प्रसारण।
लोगों को उपयुक्त
सावधानियां/बरतते हुए ग्रहण देखने के
लिए प्रोत्साहित करने के सचेत
प्रयत्न।
ग्रहण तथा अन्य खगोलीय
परिघटनाओं से जुड़ी अवैज्ञानिक
मान्यताओं/अंधविश्वासों का मुकाबला
करना।
विशिष्ट प्रयत्न
विज्ञान क्लबों के
विज्ञान प्रसार नेटवर्क (विपनेट)-8000
क्लब अधिकांश ग्रामीण क्षेत्राों में।
विद्यालयों में
खगोलिकी क्लब।
विपनेट क्लबों के लिए
विशिष्ट कार्यकलापों का आयोजन।
खगोलिकी टी एस ई 2009
संबंधी क्रियाकलाप किटों का विवरण।
एच एफ/वीएचएफ रेडियों
तरंगो के संचरण का शौकिया रेडियों
अध्ययन।
जीवन्त दूरदर्शन
प्रसारण/वेब प्रसारण
पूर्ण सूर्य ग्रहण
1995 की एक अनन्य घटना इसका दूरदर्शन
द्वारा जीवन्त प्रसारण था। यह विप्र
एवं दूरदर्शन के निकट सहयोग का परिणाम
था। इस बार भी विप्र दूरदर्शन के
सहयोग से पूर्ण सूर्य ग्रहण की
सम्पूर्ण घटना को हर घर के टेलीविजन
सेट पर जैसे वह घटित होगी वैसे ही
दिखाएगा।
विप्र की वेबसाइट पर
भी सम्पूर्ण घटना का वेब प्रसारण
होगा।
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